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कक्षा 12

विषय रसायन विज्ञान

पाठ- रासायनिक बलगतिकी

प्र.1. रासायनिक बल गतिकी किसे कहते है ?

उ0 भौतिक रसायन की वह शाखा जिसमें विभिन्न अभिक्रियाओं के वेग, क्रि्याविधियों तथा वेंग को प्रभावित करने वाले कारको का अध्ययन किया जाता है रासायनिक बल गतिकी कहलाती है।

प्र.2. रासायनिक अभिक्रिया का वेग किसे कहते हैं ?

उ0 अभिकारक या उत्पाद की सान्द्रता में प्रति इकाई समय में होने बले परिवर्तन को रासायनिक अभिक्रिया का वेग कहते हैं।

अभिक्रिया वेग = अभिकारक की सांद्रता में कमी / कमी में लगा समय

= उत्पाद की सांद्रता में वृद्धि / वृद्धि में लगा समय

प्र.3. अभिकारक व उत्पाद की सांद्रता का समय के साथ परिवर्तन का आरेख खींचिए ।

प्र.4. अभिक्रिया का औसत वेग किसे कहते हैं ?

उ0 किसी निश्चित समय अन्तराल में अभिकारक या उत्पाद की सांद्ता में परिवर्तन की दर को अभिक्रिया का औसत वेग कहते हैं।

प्र.5. अभिक्रिया का तात्क्षणिक वेग किसे कहते हैं ?

उ० किसी निश्चित क्षण पर अभिक्रिया का वास्तविक वेग तात्क्षणिक वेग कहलाता है।

तात्क्षणिक वेग =

प्र.6. किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग तथा अभिक्रिया के स्टॉइकियोमिती गुणांकों में क्या संबंध है ?

उ0 जब किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग कौ अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन की दर के रूप में व्यक्त किया जाता है तो उस अभिक्रिया या उत्पाद के स्टॉइकियोमिती गुणांक से भाग दिया जाता है।

प्र.7. अभिक्रिया 2A-+D के लिए अभिक्रिया वेग लिखिए।

उ0 अभिक्रिया वेग = \displaystyle -\frac{1}{2}\frac{{d\left[ A \right]}}{{dt}}=+\frac{{d\left[ C \right]}}{{dt}}=+\frac{{d\left[ D \right]}}{{dt}}

प्र.7. अभिक्रिया वेग का मात्रकृ क्या होता है ?

उ0 मोल लीटर -1 सेकण्ड

प्र.9. द्रव्य अनुपती क्रिया नियम को परिभाषित कीजिए ?

उ0 द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम के अनुसार निश्चित ताप पर किसी रासायनिक अभिक्रिया का वेग

क्रियाकारकों की सांद्रता के गुणनफल के समान्ुपाती होता है। किसी अभिक्रिया aA + Bb – उत्पाद, के लिए

अभिक्रिया वेग \displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}\alpha {{\left[ A \right]}^{a}}{{\left[ B \right]}^{b}}

या, \displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}=k{{\left[ A \right]}^{a}}{{\left[ B \right]}^{b}}

यहाँ k = विशिष्ट अभिक्रिया वेग या वेग नियतांक

प्र.10. विशिष्ट अभिक्रिया वेग या वेग नियतांक किसे कहते हैं ?

उ0 किसी रासायनिक अभिक्रिया का वह वेग जब समस्त क्रियाकारकों की सान्द्रताएँ इकाई होती है विशिष्ट अभिक्रिया वेग कहलाता है।

प्र.11. जटिल या संकुल अभिक्रिया किसे कहते हैं ?

उ0 वे अभिक्रियाएँ जो एक से अधिक पदों में स्पन्न होती है जटिल या संकुल अभिक्रिया कहलाती है।

प्र.12. वेग निर्धारक पद किसे कहते है।

उ0 वे अभिक्रियाएँ जो एक से अधिक पदों में सम्पन्न होती हैं उनमें सबसे धीमा पद अभिक्रिया का वेग निर्धारित करता है। इसी को वेग निध्धारक पद कहते है।

प्र.13. वेग नियतांक की इकाई ज्ञात करने का सामान्य सूत्र लिखिए।

उ0 (सान्द्रता)1-n समय-1

\displaystyle {{\left[ {\frac{{mol}}{{litre}}} \right]}^{{1-n}}}{{\sec }^{{-1}}}

n = अभिक्रिया की कोटि

प्र.14. शून्य, प्रथम, द्वितीय कोटि अभिक्रिया के लिए वेग नियतांक की इकाई लिखिए।

उ0 शून्य कोटि : मोल लीटर-1 सैकण्ड-1

प्रथम कोटि : सैकण्ड-1

द्वितीय कोटि : मोल-1 लीटर सैकण्ड-1

प्र.15. अभिक्रिया की कोटि किसे कहते हैं ?

उ0 किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग नियम में क्रियाकारक के सांद्रता पदों के घातांकों का योग कोटि कहलाती है। वेग नियम प्रयोगों द्वारा ज्ञात किया जाता है।

वेग = k[A] [BJ कोटि =1+1=2

प्र. 16. अणु संख्या किसे कहते हैं ?

उ0 अणु संख्या किसी रासायनिक अभिक्रिया के स्टॉइकियोमिती समीकरण् में भाग् लेने वाले क्रियाकारक अणुओं, परमाणुओं या आयनों की संख्या है।

उदाहरण A + 2B → उत्पाद

अणु संख्या = 1+2 =3

प्र.17. अभिक्रिया की कोटि व आण्विकता में अंतर बताईये।

उ०

कोटि

आण्विकता

1 यह प्रायोगिक राशि है।

यह सैद्धान्तिक राशि है।

2 यह शून्य अथवा भिन्नात्मक हो सकती है।

यह शून्य के अलावा कोई भी पूर्ण संख्या होगी।

3 यह ऋणात्मक हो सकृती है।

यह सदैव धनात्मक होती है।

4 यह प्राथमिक व जटिल दोनों अभिक्रियाओं पर लागू होती है।

यह केवल प्राथमिक अभिक्रियाओं पर लागू होती है।

5 जटिल अभिक्रियाओं की कोटि मंद पद द्वारा ज्ञात की जाती है।

जटिल अभिक्रियाओं में प्रत्येक पद में भाग लेने वाले अणुओं की संख्या अलग-अलग होती है।

प्र.18. अभिक्रिया वेग तथा अभिक्रिया वेग नियतांक में विभेद कीजिए।

उ0

अभिक्रिया वेग

अभिक्रिया वेग नियतांक

1 अभिक्रिया वेग, अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में प्रति इकाई समय में होने वाला परिवर्तन है।

यह अभिक्रिया वेग नियम में समानुपाती स्थिरांक है तथा यह अभिक्रिया का वह वेग है जब अभिकारकों की मोलर सांद्रता इकाई है।

2 अभिक्रिया वेग अभिकारकों की मोलर सांद्रता पर निर्भर करता है।

निश्चित तापमान पर किसी विशिष्ट अभिक्रिया के लिए वेग नियतांक स्थिर होता है तर्था यह अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर नहीं करता है।

3. अभिक्रिया वेग की इकाई मोल लीटर-1 समय-1 होती है।

इसकी इकाई कोटि पर निर्भर करती है। (मोल/ लीटर)1-n समय-1

जहाँ n = अभिक्रिया की कोटि

प्र.19. उस अभिक्रिया की कोटि बताईये जिसके अभिक्रिया वेग तथा वेग नियतांक की इकाई समान होती है।

उ0 शून्य कोटि

प्र.20. शुन्य कोटि अभिक्रियाएँ किसे कहते हैं ? उदाहरण लिखो।

उ0 अभिक्रियाएँ जिनका वेग अभिकारकों की सांद्रण के शून्य घातांक के समानुपाती होता है। उन्हें शून्य कोटि अभिक्रयाएँ कहते हैं। उदाहरण

(i) प्रकाश की उपस्थिति में H2 व Cl2 के बीच अभिक्रिया

H2 + Cl2 →2HCI

(ii) उच्च दाब पर मोलिब्डेनम की सतह पर फॉस्फीन का अपघटन

2PH3 →2P + 3H2

(iii) उच्च दाब पर टंगस्टन की सतह पर अमोनिया का अपघटन

2NH3 →N2 +3H2

प्र.21. एक शुन्य कोटि अभिक्रिया के लिए अवकलित व समाकलित वेग समीकृरण ज्ञात कीजिए।

एक शून्य कोटि अभिक्रिया को निम्नानुसार लिखा जा सकता है।

अभिकारक A की प्रारंभिक सांद्रता a मोल/ लीटर है। । समय पश्चात् x भाग विघटित होता है अतः t समय पर A की सांद्रता a-x रह जाती हैं तथा x मोल/ लीटर उत्पाद बन जाता है।

अभिक्रिया का वेग = \displaystyle -\frac{{d\left[ A \right]}}{{dt}}=\frac{{-d\left( {a-x} \right)}}{{dt}}=\frac{{dx}}{{dt}}

परिभाषानुसार शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए वेग अभिकारक की सांद्रता के शून्य घातांक के समानुपाती होता है अत:

\displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}\alpha {{\left[ A \right]}^{o}}

\displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}=k{{\left[ A \right]}^{o}}

क्योकि [A]° = 1

\displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}=k ….1)

यह शुन्य कोटि अभिक्रिया के लिए अवकल वेग समीकरण है।

समाकल समीकरण :

\displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}=k

या dx = ko dt

समाकलन करने पर

\displaystyle \int{{dx}}={{k}_{0}}\int{{dt}}

x = kt + c ……………. .(2)

यहां C = समाकलन स्थिरांक

जब t= 0 तब x= 0 है। ये मान समीकरण (2) में रखने

0 = ko x 0 + c

= c= 0

C का मान समीकरण (2) में रखने पर

x=ko t …(3)

यह शुन्य कोटि अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग सर्मीकरण है।

प्र.22. अर्द्ध आयुकाल किसे कहते है ?

किसी रसायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों की सांद्रता को आधा विघटित होने में लगा समय अर्द्ध आयुकाल कहलाता है।

प्र.23 शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए अर्द्ध आयुकाल का सूत्र ज्ञात करे।

उ0 शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए :

X= ko t ..(1) होता है।

अर्द्ध आयुकाल की परिभाषा से t= t½ जब x =a/2 होगा जहाँ a प्रारंभिक सांद्रता है।

t तथा x के मान (1) में रखने पर

a/2 = k0t½

या, t½ =a / 2ko

प्र.24. क्या शुन्य कोटि अभिक्क्रिया का अद्द्ध आयुकाल अभिकारक की प्रारंभिक सांदरता पर निर्भर करता है ?

उ0 शून्य कोटि अभिक्रिया का अर्द्ध आयुकाल प्रारंभिक सांद्रता के समानुपाती होता है।

t½ ∝ a

प्र.25. शुन्य कोटि अभिक्रिया के समाकलित वेग समीकरण का आलेख खींचिए।

उ0 समाकलित वेग समीकरण

x= ko t

यह एक सरल रेखा समीकरण y=mx के समान है।

x तथा t के मध्य आलेख खींचने पर एक सरल रेखा प्राप्त होती है जो शून्य से गुजरती है। इस रेखा का ढाल k0 के बराबर होगा।

\displaystyle \tan \theta =\frac{{\Delta x}}{{\Delta t}}={{k}_{0}}

प्र.26 प्रथम कोटि अभिक्रिया किसे कहते है ? उदाहरण लिखो।

उ0 वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया का वेग एक अभिकारक की सांद्रता के प्रथम घात के समान्पाती होता हैं उसे प्रथम कोटि की अभिक्रिया कहते है।

(i) अमोनियम नाइट्राइट का अपघटन

NH3NO2 → 2H20 + N2

(ii) ऐजो आइसो प्रोपेन का ऊ्ष्मीय अपघटन

(CH3)2-CH -N=N-CH- (CH3)2 →N2 + C6H14

(iii) नाभिकीय अभिक्रियाएँ या रेडियो एक्टिव विघटन अभिक्रियाएँ सभी प्रथम कोटि अभिक्रियाएँ होती है।

प्र.27. प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए अवकलित व समाकलित वैग समीकरण ज्ञात कीजिए।

उ0 माना एक प्रथम कोटि अभिक्रिया निम्नि प्रकार

अभिकारकA की प्रारंभिक सांद्रता a मोल / लीटर है। । समय पश्चात् x भाग विघटित होता है अतः समय परं A की सांद्रता a-x रह जाती है तथा x मोल/ लीटर उत्पाद बन जाता है।

अभिक्रिया का वेग \displaystyle -\frac{{d\left[ A \right]}}{{dt}}=-\frac{{d\left[ {a-x} \right]}}{{dt}}=\frac{{dx}}{{dt}}

परिभाषानुसार प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग अभिकारक की सांद्रता के प्रथम घात के समान्पाती होता है। अतः

\displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}\alpha {{\left( {a-x} \right)}^{1}}

या \displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}={{k}_{1}}\left( {a-x} \right) ….. (1) k1 = वेग नियतांक

समीकरण (1) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अवकल वेग समीकरण है।

समाकल समीकरण :

समीकरण (1) से

\displaystyle \frac{{dx}}{{dt}}={{k}_{1}}\left( {a-x} \right)

या \displaystyle \frac{{dx}}{{\left( {a-x} \right)}}={{k}_{1}}dt

समीकरण (2) का समाकलन करने पर

\displaystyle \int{{\frac{{dx}}{{\left( {a-x} \right)}}={{k}_{1}}}}\int{{dt}}

सूत्र \displaystyle \int{{\frac{{dx}}{{\left( {a-x} \right)}}}}=\ln x

\displaystyle -\ln \left( {a-x} \right)={{k}_{1}}t+c ……………… (3)

यहाँ c समाकलन स्थिरांक है।

हम समाकलन स्थिरांक का मान ज्ञात करेंगे।

जब t = 0 तब x = 0

ये मान स्मीकरण ( 3 ) में रखने पर

-ln (a – 0) = k1 x 0 + c

– ln a = C —(4)

  1. से c का मान (3) में रखने पर

-ln (a-x) = k1t – ln a

या k1t = ln a – ln (a -x)

सूत्र ln A – ln B = ln (A/B)

\displaystyle {{k}_{1}}t=\ln \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right)

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{1}{t}\ln \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right)

ln x = 2.303 1og x होता है।

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{t}\log \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right)

यह प्रथम कोटि अभिदक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण है।

प्र.28. प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए अर्ध आयुकाल ज्ञात कीजिए।

उ0 प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण है :

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{t}\log \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right) ……….. (1)

अर्धे आयुकाल की परिभाषा से –

जब t= t½ तब x = a/2

ये मान समीकरण (1) में रखने पर

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{{{{t}_{{\scriptscriptstyle 1\!/\!{ }_2}}}}}\log \left( {\frac{a}{{a-{}^{a}\!\!\diagup\!\!{}_{2}\;}}} \right)

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{{{{t}_{{\scriptscriptstyle 1\!/\!{ }_2}}}}}\log \left( {\frac{a}{{2a-a}}\times 2} \right)

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{{{{t}_{{\scriptscriptstyle 1\!/\!{ }_2}}}}}\log \left( {\frac{a}{a}\times 2} \right)

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{{{{t}_{{\scriptscriptstyle 1\!/\!{ }_2}}}}}\log 2

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{{{{t}_{{\scriptscriptstyle 1\!/\!{ }_2}}}}}\times 0.3010

\displaystyle {{t}_{{\scriptscriptstyle 1\!/\!{ }_2}}}=\frac{{0.693}}{{{{k}_{1}}}}

यह प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए अर्द्ध आयुकाल है।

प्र.29. प्रथम कोटि अभिक्रिया का अर्द्ध आयुकाल प्रारभिक सांद्रता पर किस प्रकार निर्भर करता है ?

उ0 प्रथम कोटि अभिक्रिया का अर्द्ध आयुकाल प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता है।

प्र.30. प्रथम कोटि अभिक्रिया के समाकलित वेग समीकरण का आलेख खींचिए।

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{t}\log \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right) ………….(i)

\displaystyle \frac{{{{k}_{1}}t}}{{2.303}}=\log \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right) ………(ii)

\displaystyle \log \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right)=\left( {\frac{{{{k}_{1}}}}{{2.303}}} \right)t

यह समीकरण y= mx के समान है यहाँ \displaystyle y=\log \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right) तथा x =t, तथा \displaystyle m=\frac{{{{k}_{1}}}}{{2.303}},

अतः \displaystyle \log \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right) तथा t के मध्य आलेख खींचने पर मूल बिन्दु से जाती हुई सरल रेखा प्राप्त होती है जिसका ढाल \displaystyle {\frac{{{{k}_{1}}}}{{2.303}}} होगा।

\displaystyle {\tan \theta =\frac{{{{k}_{1}}}}{{2.303}}}

(ii) समीकरण (2) को निम्न प्रकार से भी लिखा जा सकेता है।

\displaystyle \log \left( {\frac{a}{{a-x}}} \right)=\left( {\frac{{{{k}_{1}}t}}{{2.303}}} \right)

या \displaystyle \log a-\log \left( {a-x} \right)=\frac{{{{k}_{1}}t}}{{2.303}}

या \displaystyle \log \left( {a-x} \right)=\frac{{{{k}_{1}}t}}{{2.303}}+\log a ………(3)

समीकरण (3) y= mx + c के समान सरल रेखा समीकरण है।

Log (a- x) तथा t के मध्य आलेख खींचने पर सरल रेखा प्राप्त होती है जो y अक्ष पर log a अंतःखण्ड काटती है तथा इसकी ढ़ाल \displaystyle \frac{{-{{k}_{1}}}}{{2.303}} होगा।

ढाल = \displaystyle \frac{{-{{k}_{1}}}}{{2.303}}

प्र.31. अन्तराल समीकरण किसे कहते है? प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए अंतराल समीकरण ज्ञात कीजिए।

उ0 जब अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता ज्ञात नहीं हाती है तो वेग नियतांक ज्ञात करने के लिए अंतराल समीकरण का उपयोग किया जाता है।

(i) t= t1 पर माना x =x1, है तब

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{{{{t}_{1}}}}\log \left( {\frac{a}{{a-{{x}_{1}}}}} \right) ….1)

(ii) t= t2 पर माना x =x2 है तब

\displaystyle {{k}_{1}}=\frac{{2.303}}{{{{t}_{2}}}}\log \left( {\frac{a}{{a-{{x}_{2}}}}} \right)

\displaystyle {{t}_{2}}=\frac{{2.303}}{{{{k}_{1}}}}\log \left( {\frac{a}{{a-{{x}_{2}}}}} \right)

\displaystyle {{t}_{1}}=\frac{{2.303}}{{{{k}_{1}}}}\log \left( {\frac{a}{{a-{{x}_{1}}}}} \right) …………..(4)

(3) में से (4) घटाने पर

सूत्र log A – log B =log A/B होता है।

यह अंतराल समीकरण है।

प्र.32. छदम प्रथम कोटि अभिक्रिया किसे कहते है।

उ0 वे अभिक्रियाएँ जिनकी अणुसंख्यता 1 से अधिक होती है किन्तु जो प्रथम कोटि की बल गतिकी का अनुसरण करती है इन्हें छद्म प्रथर्म कोटि अभिक्रियाएँ कहते है।

उदाहरण :

(i) तन् खनिज अम्ल की उपस्थिति में एस्टर का जल अपघटन

(ii) शर्करा को प्रतीपन

प्र.33 अभिक्रिया वेग अभिकारकों की सांद्रता पर किस प्रकार निर्भर करता है?

उ0 अभिक्रिया का वेग, अभिकारकों की सांद्रता के अनुक्रमानुपाती होता है।

प्र.34 तापमान बढ़ाने पर अभिक्रिया वेग पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उ0 तापमान बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ता है।

प्र.35 तापमान बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग क्यों बढ़ता है?

उ0 तापमान बढ़ाने पर अभिकारक अणुओं की गतिज ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है, अभिकारकों के टकराने की दर में वृद्धिध होती है जिससे सक्रियत अणुओं की संख्या बढ़ जाती है। फलस्वरूप अभिकारक अणुओं की उत्पादों में रूपांतरित होने की दर बढ़ जाती है।

प्र.36, उत्प्रेरक किसे कहते हैं?

उ0 वे बाह्य पदार्थ जो अभिक्रिया वेग को बढ़ा देते है किन्तु स्वयं अभिक्रिया के दौरान रासायनिक रूप से अपरिवर्तित रहते हैं, उत्प्रेरक कहलाते है।

प्र.37. उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया का वेग क्यों बढ़ जाता है?

उ0 उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया एक भिन्न पथ से होने लगती है ज़िसके लिए सक्रियण ऊर्जा का मान कम होता है। जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है

प्र.38. अभिकारक अणुओं के पृष्ठीय क्षेत्रफल का अभिक्रिया वेग पर क्या प्रभाव पड़ता है।

उ0 अभिकारक अणुओं का पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ता है। पदार्थ जितने सूक्ष्म कणों में विभाजित होता है अभिक्रिया का वेग उतना ही अधिक हो जाता है।

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