1. कोशिका (Cell)Biology (जीव विज्ञान)Zoology (जन्तु विज्ञान)Botany (वनस्पति विज्ञान)कोशिका (Cell)कोशिका के अंग (Parts of Cell)माइटोकॉन्ड्रिया / सूत्रकणिका (Mitochondria)अंतः प्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) — ERराइबोसोम (Ribosome)गॉल्जी बॉडी (Golgi body/Golgi Apparatus)रसधानी (Vacuoles)लाइसोसोम (Lysosome)सेंट्रोसोम / तारककाय (Centrosome)केन्द्रक (Nucleus)जीवद्रव्य (Protoplasm)कोशिका भित्ति (Cell Wall)कोशिका झिल्ली (Cell membrane)लवक (Plastid)1. वर्णी लवक (Chromoplast)2. अवर्णी लवक (Leucoplast)3. हरित लवक (Chloroplast)प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाएंगुणसूत्र (Chromosome)कुछ जीवों के CHROMOSOMEकेन्द्रक अम्ल (Nucleic Acid)DNA (Deoxy Ribose Nucleic acid)RNA (Ribose Nucleic acid)कोशिका विभाजन (Cell Division)1. असूत्री विभाजन (Amitosis)2. समसूत्री विभाजन (Mitosis)3. अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis)सिंड्रोम (Syndrome)1. टर्नर सिंड्रोम (Turner Syndrome)2. क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome)3. डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome)4. पटाऊ सिंड्रोम (Patau Syndrome)
1. कोशिका (Cell)
Biology (जीव विज्ञान)
- विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत जीवधारियों (सजीवों) का अध्ययन किया जाता है, जीव विज्ञान (Biology) कहलाती है।
- जीव विज्ञान शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम लैमार्क (Lamarck) तथा ट्रिविरेनस (Treviranus) ने 1802 ई. में किया। जबकि प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक अरस्तू (Aristotle) ने जीव विज्ञान को एक क्रमबद्ध ज्ञान के रूप में विकसित किया, इन्होंने ही सर्वप्रथम पौधों और जन्तुओं के जीवन के विभिन्न पक्षों के विषय में अपने विचार एवं अनुभव प्रकट किए, इसलिए इन्हें जीव विज्ञान का जनक (Father of Biology) कहा जाता है।
- अरस्तू को विज्ञान, जीव-विज्ञान तथा जन्तु विज्ञान तीनों का जनक माना जाता है।
- जीव विज्ञान (Biology) शब्द दो ग्रीक शब्दों Bios = life (जीवन) तथा logos = Study (अध्ययन) से मिलकर बना है।
- अध्ययन की सुविधा हेतु जीव विज्ञान को दो शाखाओं में बांटते हैं— (1) Zoology (जन्तु विज्ञान) (2) Botany (वनस्पति विज्ञान)
Zoology (जन्तु विज्ञान)
- इसके अन्तर्गत जन्तुओं का अध्ययन करते हैं। Zoology के जनक (Father of Zoology) अरस्तू को कहा जाता है।
- अरस्तू ने अपनी पुस्तक ‘जन्तु इतिहास’ (Historia Animalium) में जन्तुओं की रचना, स्वभाव, वर्गीकरण, जनन आदि का वर्णन किया।
Botany (वनस्पति विज्ञान)
- इसके अंतर्गत पेड़-पौधों की संरचना, विकास, कार्य, वर्गीकरण और उसके पर्यावरण के साथ संबंध का अध्ययन किया जाता है। Botany का जनक थियोफ्रेस्टस को कहा जाता है। थियोफ्रेस्टस ने पौधों का वर्णन अपनी पुस्तक ‘Historia Plantarum’ में किया है।
- वनस्पति विज्ञान का अध्ययन करने वाले को वनस्पति शास्त्री कहा जाता है।
- ‘Botany’ शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के ‘Botane’ शब्द तथा लैटिन भाषा के ‘Botanics’ शब्द से हुई है, जिसका अर्थ ‘घास’ होता है।
- भारतीय वनस्पति विज्ञान के जनक विलियम रॉक्सबर्ग को माना जाता है।
कोशिका (Cell)
- जीवन की सबसे छोटी कार्यात्मक एवं संरचनात्मक इकाई कोशिका (Cell) होती है।
- कोशिका का अध्ययन ‘साइटोलॉजी’ (Cytology) कहलाता है।
- प्रत्येक जीवधारी की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई है।
- प्रत्येक जीवधारी का शरीर कोशिका से मिलकर बना है।
- कोशिका का लैटिन भाषा में अर्थ होता है— एक छोटा कमरा।
- सर्वप्रथम कोशिका की खोज 1665 ई. में रॉबर्ट हुक ने की थी। किंतु इन्होंने मृत कोशिका की खोज की थी। इन्हें Father of Cytology कहते हैं। जिसको इन्होंने कॉर्क (Cork) की एक परत में देखा था।
- मृत कोशिकाओं (Dead Cell) को नेक्रोसिस (Necrosis) कहते हैं।
- गुर्दे की बीमारी को नेफ्रोसिस (Nephrosis) कहते हैं।
- रॉबर्ट ब्राउन ने अपनी कोशिका संबंधित खोजों का वर्णन माइक्रोग्राफिया (Micrographia) पुस्तक में किया है।
- सर्वप्रथम जीवित कोशिका की खोज 1674 ई. में एन्टोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने किया।
- लुई पाश्चर (Louis Pasteur) को Father of Bacteriology कहते हैं।
- एन्टोनी वॉन ल्यूवेनहॉक द्वारा खोजी गई कोशिकाएं – जीवाणु (Bacteria), RBC, Protozoa, Sperm (शुक्राणु) थीं।
- श्लाइडेन एवं श्वान ने कोशिका सिद्धांत दिया और कहा कि शरीर कोशिकाओं से बना है। अतः कोशिका शरीर की सबसे छोटी इकाई है।
- श्लाइडेन एवं श्वान की परिकल्पना को रूडोल्फ विर्चोव ने सर्वप्रथम संशोधित किया और व्याख्या किया कि पूर्ववर्ती कोशिकाएं विभाजित होती हैं तथा इनसे नई कोशिकाएं बनती हैं।
- आधुनिक कोशिका विज्ञान के पिता ‘Swanson’ को कहा जाता है। इन्होंने ‘Cell’ नामक पुस्तक लिखी।
- भारतीय कोशिका विज्ञान के पिता A.K. Sharma को कहा जाता है।
- सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्मा (PPLO) की होती है।
- सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग के अंडे की होती है।
- सबसे लम्बी कोशिका तंत्रिका तंत्र (Nervous System) या स्नायु कोशिका की होती है।
- मानव में सबसे बड़ी कोशिका — Ovum (अंडाणु) (female में)
- मानव में सबसे छोटी कोशिका — Sperm (शुक्राणु) (male में)
- एककोशिकीय (Unicellular) — अमीबा, जीवाणु
- बहुकोशिकीय (Multicellular) — मनुष्य, वृक्ष
Note:
- तंत्रिका कोशिका में किसी भी प्रकार का विभाजन नहीं होता है। अतः यह अपनी क्षतिग्रस्त कोशिका को ठीक नहीं कर सकता। इसी कारण सिर में चोट लगने से शीघ्र ही मृत्यु हो जाती है।
- सबसे तेजी से कोशिका विभाजन लिवर (जिगर)/यकृत में होता है। यह अपनी क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को स्वतः ही ठीक कर सकती है।
- मानव शरीर की एकमात्र कोशिका जो अपना आकार बदल सकती है- WBC
- जल की मात्रा कोशिका में सर्वाधिक 80% होती है।
कोशिका के अंग (Parts of Cell)

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माइटोकॉन्ड्रिया / सूत्रकणिका (Mitochondria)
- इसकी खोज ऑल्टमैन ने किया और इसका नाम बायो ब्लास्ट (Bio blast) रखा। यहाँ ऑक्सी श्वसन होता है।
- यहाँ क्रेब्स चक्र चलता है, जिसके फलस्वरूप ATP तथा ग्लूकोज बनते हैं और हमें ऊर्जा मिलती है। इसी कारण इसे कोशिका का शक्ति गृह/ ऊर्जा गृह (Power House / Plant) कहते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया के आंतरिक दीवारों को क्रिस्टी (Cristae) कहते हैं।
- इसको कोशिका का इंजन कहते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया अर्द्ध स्वायत्त होता है क्योंकि यह 70-80% अपना कार्य स्वयं करता है तथा उनके पास अपना DNA और राइबोसोम होते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया केन्द्रक के बाद दूसरा सबसे बड़ा कोशिका अंग है।
- माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना दोहरी झिल्ली वाली संरचना होती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया का अपना स्वयं का डीएनए एवं राइबोसोम होता है इसलिए वे अपना प्रोटीन बना सकते हैं।
अंतः प्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) — ER
- यह झिल्लियों का एक जाल होता है जो केन्द्रक झिल्ली तथा कोशिका झिल्ली के मध्य स्थित होता है।
- यह कोशिका के अंदर से आंतरिक सहायता देता है। अतः इसे कोशिका का आंतरिक कंकाल कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है—
- Smooth ER (चिकनी): यह कार्बोहाइड्रेट तथा वसा का निर्माण करता है। यह कोशिका झिल्ली के आसपास कम स्थायी रहता है। यह लिपिड संश्लेषण का कार्य करती है।
- Rough ER (खुरदरी): इस पर Ribosome होता है। यह प्रोटीन का निर्माण करता है। यह केन्द्रक के आसपास अधिक स्थायी रहता है।
- ER एकल झिल्ली कोशिकांग है।
राइबोसोम (Ribosome)
- इसका निर्माण केंद्रक में स्थित केन्द्रिका (Nucleolus) द्वारा होता है।
- यह केंद्रक पर बनता है। ये डमरू की आकृति के या गोलाकार होते हैं तथा R/ER पर रहता है।
- यह कोशिका के अंदर का सबसे छोटा अंग है। यह प्रोटीन का निर्माण करता है। अतः इसे प्रोटीन की फैक्ट्री कहते हैं।
- राइबोसोम की खोज 1953 में E. Palade नामक वैज्ञानिक ने की थी।
- राइबोसोम कोशिका को सार्वत्रिक कोशिकांग (Universal Component of Cell) भी कहा जाता है।
- राइबोसोम में कोशिका झिल्ली नहीं पाई जाती है।
- राइबोसोम सबसे छोटा कोशिकांग है।
- स्तनधारियों की एक कोशिका में 10 मिलियन राइबोसोम पाये जाते हैं।
- यह दो प्रकार का होता है-
- 70 S: 50 S तथा 30 S Sub Unit से बना होता है। यह हल्का होता है तथा प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है। 70 S राइबोसोम माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट एवं बैक्टीरिया में पाये जाते हैं।
- 80 S: 60 S तथा 40 S Sub Unit से बना होता है। यह भारी होता है तथा यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है। 80 S यह विकसित पौधों एवं जन्तु कोशिकाओं में पाये जाते हैं।
- S = Sedimentation Coefficient (स्वेडबर्ग गुणांक/अवसादन दर)
Note:
- जब बहुत सारे राइबोसोम RNA से जुड़े होते हैं तब उन्हें Polysomes कहा जाता है। यह प्रोटीन की कार्यात्मक इकाई है।
- 50 S तथा 60 S को बड़ी Sub-unit कहते हैं।
- 30 S तथा 40 S को छोटी Sub-unit कहते हैं।
- राइबोसोम के दोनों Sub-unit (50 S-30S) तथा (60S-40S) को आपस में Mg2+ आयन से जोड़ा जाता है।
- राइबोसोम का सर्वप्रथम प्रयोगशाला में संश्लेषण नोमूरा (Nomura) ने किया था।
गॉल्जी बॉडी (Golgi body/Golgi Apparatus)
- गॉल्जी बॉडी एक कोशिकांग है जो कोशिका में बिखरे हुए प्रोटीन तथा लिपिड (वसा) के अणुओं को बांधकर रखता है।
- गॉल्जी बॉडी t-RNA की सहायता करता है क्योंकि t-RNA एक स्थानांतरण RNA है जो प्रोटीन अणुओं को लेकर जाता है।
- इसकी खोज कैमिलो गॉल्जी द्वारा 1898 में हुई थी। यह पदार्थों का परिवहन करता है अर्थात् यातायात में सहायक है। इसी कारण इसे ट्रैफिक पुलिस भी कहा जाता है। यह केवल यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाई जाती है।
- इसे लाइपोकॉन्ड्रिया (Lipochondria) भी कहते हैं।
- पादप कोशिकाओं में गॉल्जी बॉडी का नाम Dictyosome कहा जाता है।
- ये केन्द्रक के आसपास उपस्थित रहते हैं।
- यह कोशिका का मुख्य स्रावी/स्रवण (Secretion) अंग है।
- गॉल्जी बॉडी के टूटने से लाइसोसोम तथा रसधानी (Vacuoles) का निर्माण होता है।
रसधानी (Vacuoles)
- किसी कोशिका में खाली पड़े स्थान को रसधानी कहते हैं।
- आपातकाल स्थिति में रसधानी जल, खनिज तथा पोषक तत्वों का संग्रह (Storage) करता है।
- यह जन्तुओं में छोटा होता है किंतु पादपों में बहुत बड़ा होता है।
- पादपों का सबसे बड़ा कोशिकांग है जो कोशिका का 50-90% भाग घेरता है।
- रसधानी को सबसे पहले Splanzi के द्वारा प्रोटोजोआ (Protozoa) में देखा गया था।
- रसधानी (Vacuoles) शब्द Dujardin द्वारा दिया गया था।
- पादप कोशिका में रसधानियों को सबसे पहले Schwann के द्वारा देखा गया था।
- Vacuoles एक झिल्ली से घिरी हुई संरचना है जिसे Tonoplast कहा जाता है।
- रसधानियां ठोस अथवा तरल पदार्थों की संग्राहक थैलियां हैं।
लाइसोसोम (Lysosome)
- यह कोशिका के ‘अंदर पाचन’ का कार्य करता है। इसके अंदर जल अपघटक enzyme (Hydrolytic Enzyme) पाया जाता है।
- कोशिका के अंदर का कोई अंग यदि काम नहीं करता है तो यह उस अंग को नष्ट कर देता है।
- जब पूरी कोशिका कार्य नहीं करती है तो यह फट जाता है, जिससे पूरी कोशिका नष्ट हो जाती है। अतः इसे आत्महत्या की थैली (Suicidal Bag), Atom bomb, कोशिका की सफाईकर्मी (Scavenger of the Cell) या Disposal bag भी कहा जाता है।
- स्तनधारियों के लाल रक्तकणिका (RBC) में लाइसोसोम नहीं पाया जाता है।
- इसकी खोज 1974 में ‘डी डुवे’ ने की थी।
- RBC के अंदर लाइसोसोम नहीं पाया जाता है। अतः RBC मरने के बाद Spleen (प्लीहा/तिल्ली) में जाता है, जिस कारण Spleen को RBC का कब्र कहते हैं।
- आत्मलयन (Autolysis) में लाइसोसोम स्वयं फटकर रोग ग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट कर देता है।
सेंट्रोसोम / तारककाय (Centrosome)
- यह कोशिका विभाजन करता है। यह मस्तिष्क में नहीं पाया जाता है। जिस कारण तंत्रिका कोशिका में विभाजन नहीं होता है। यह केवल जन्तु कोशिका में पाया जाता है।
- पादप कोशिकाओं में कोशिका विभाजन Cell Plate के द्वारा होता है।
- Centrosome की खोज वान बेनेडेन ने 1883 में की थी और थियोडोर बोवेरी ने 1888 में इसका नामकरण किया।
- सेंट्रोसोम की संख्या या संरचना में किसी भी प्रकार की असामान्य वृद्धि को कैंसर के विकास से जुड़ा हुआ माना जाता है।
- सेंट्रोसोम दो सेंट्रिओल (Centriole) और पेरीसेंट्रिओलर (Pericentriolar) मटेरियल से बना होता है।
- सेंट्रोसोम स्वयं सूक्ष्मनलिकाओं के नौ त्रिक (Triplets) से बने होते हैं, जो एक बैलगाड़ी के पहिए जैसी संरचना बनाते हैं।
केन्द्रक (Nucleus)
- इसकी खोज रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 ई. में की थी।
- यह कोशिका को नियंत्रित करता है, अतः इसे ‘कोशिका का दिमाग’ भी कहते हैं।
- इसमें 80% प्रोटीन पाया जाता है।
- केन्द्रक किसी भी कोशिका में सबसे बड़ा कोशिकांग होता है।
- मनुष्य के त्वचा में केन्द्रक का अभाव होता है।
Note:
- इंसानों में RBC (लाल रुधिर कोशिका) को बिना दिमाग वाली कोशिका कहा जाता है तथा इसमें केन्द्रक नहीं पाया जाता है।
- पादपों में Sieve कोशिका को बिना दिमाग वाली कोशिका कहा जाता है तथा इसमें केन्द्रक अनुपस्थित होता है।
- केन्द्रक का अध्ययन करना Karyology कहलाता है।
- गुणसूत्र द्वारा केन्द्रिका (Nucleolus) का निर्माण होता है।
जीवद्रव्य (Protoplasm)
- इसकी खोज पुरकिंजे ने की थी। यह एक तरल गाढ़ा पदार्थ होता है। हक्सले ने इसे जीवन का भौतिक आधार बताया है। सभी जैविक क्रियाएं इसी द्रव के अंदर होती हैं। इसका 80% भाग जल का बना होता है।
- जीव द्रव दो प्रकार के होते हैं— (1) कोशिका द्रव (Cytoplasm) (2) केन्द्रिका द्रव (Nucleoplasm)
- (1) कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm): जीवद्रव्य का वह भाग जो केंद्रक के बाहर तथा कोशिका झिल्ली के अंदर होता है, उसे कोशिकाद्रव्य कहते हैं। यह कोशिका को सूखने से बचाता है।
- (2) केन्द्रिकाद्रव्य (Nucleoplasm): जीवद्रव्य का वह भाग जो केंद्रक के अंदर होते हैं, केन्द्रिकाद्रव्य कहलाता है।
कोशिका भित्ति (Cell Wall)
- कोशिका भित्ति की खोज रॉबर्ट हुक के द्वारा की गई थी।
- कोशिका के बाहरी आवरण को कोशिका भित्ति कहा जाता है।
- यह सेल्यूलोज़ का बना होता है और केवल पादपों में पाया जाता है। यह पेड़-पौधों को सुरक्षा देता है।
- जीवाणु एक पादप होता है, जिसकी कोशिका भित्ति “पेप्टिडोग्लाइकेन” की बनी होती है।
- कवक की कोशिका भित्ति “काइटिन” की बनी होती है।
- शैवाल की कोशिका भित्ति सेल्यूलोज़ + CaCO3 + Galactans से बनी होती है।
कोशिका झिल्ली (Cell membrane)
- यह जन्तु तथा पादप दोनों में पाया जाता है।
- पादप कोशिका में बाहरी झिल्ली की कोशिका भित्ति तथा आंतरिक झिल्ली को प्लाज्मा झिल्ली कहा जाता है।
- जन्तु कोशिका में केवल एक ही आवरण होता है, जिसे कोशिका झिल्ली कहा जाता है।
- कोशिका झिल्ली का निर्माण फॉस्फोलिपिड्स से होता है।
- कोशिका झिल्ली द्वि-परती (Bi-layered) संरचना की बनी होती है।
- कोशिका के अंदर के सभी अवयव इसी झिल्ली के अंदर रहते हैं।
- यह कोशिका के अंदर जाने वाले पदार्थों का नियंत्रण करता है।
- यह अर्द्धपारगम्य (Semipermeable) होता है। इसका मुख्य कार्य कोशिका के अंदर जाने वाले एवं अंदर से बाहर आने वाले पदार्थ का निर्धारण करना है।
लवक (Plastid)
- लवक पादप कोशिका को रंग देने का काम करता है।
- लवक की खोज 1865 में हैकल (Haeckel) ने की थी।
- ‘लवक’ शब्द के खोजकर्ता Schimper हैं।
- यह केवल पादपों में पाया जाता है। यह तीन प्रकार का होता है—
1. वर्णी लवक (Chromoplast)
- यह रंग प्रदान करता है। EX:- टमाटर, मिर्च = लाइकोपेन। पत्तियों का पीला होना। गाजर = कैरोटीन। चुकन्दर = बीटानीन। फलों का पीला रंग = जेन्थोफिल।
2. अवर्णी लवक (Leucoplast)
- यह भोजन का संग्रह करता है। यह जड़ तथा भूमिगत तना में पाया जाता है।
- कार्बोहाइड्रेट का संग्रह एमाइलोप्लास्ट करता है।
- वसा तथा तेल का संग्रह इलियोप्लास्ट करता है।
- अमीनो तथा प्रोटीन का संग्रह प्रोटीनोप्लास्ट करता है।
3. हरित लवक (Chloroplast)
- यह पादप कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है क्योंकि इसमें मौजूद (Chlorophyll) पर्णहरित के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है।
- यह पत्ती तथा तना में पाया जाता है। इसे कोशिका का रसोई घर भी कहा जाता है।
- इसमें एन्थोसाइनिन (पिगमेंट) नहीं पाया जाता है। एन्थोसाइनिन (पिगमेंट) के कारण बैंगनी रंग होता है।
- इसमें प्रकाशिक एवं अप्रकाशिक अभिक्रिया क्रमशः ग्रेना एवं स्ट्रोमा में सम्पन्न होती है।
प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाएं
कोशिका दो प्रकार की होती हैं– प्रोकैरियोटिक (अविकसित) और यूकैरियोटिक (विकसित)।
| प्रोकैरियोटिक (Procaryotic – Undeveloped) | यूकैरियोटिक (Eukaryotic – Developed) |
|---|---|
| इसमें कोशिका के सभी अंग नहीं पाए जाते हैं। इन्हें प्रारंभिक कोशिका भी कहते हैं। | ये पूरी तरह विकसित होती है। इनमें कोशिका के सभी अंग पाए जाते हैं। |
| इसमें कोशिका झिल्ली, राइबोसोम (70S) पाया जाता है तथा शेष अंगों का अभाव देखा जाता है। | इनमें (80 S) राइबोसोम पाया जाता है। |
| इसमें कोशिका विभाजन नहीं होता है। Ex:- बैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा | इसमें कोशिका विभाजन होता है। पादप एवं जन्तुओं में। |
| केन्द्रक पर कोई आवरण (Envelope) नहीं होता। | केन्द्रक पर आवरण (Envelope) होता है। |
| श्वसन जीवद्रव्य से होता है। | श्वसन माइटोकॉन्ड्रिया से होता है। |
| कोशिका भित्ति Peptidoglycan की होती है। | कोशिका भित्ति Cellulose की होती है। |
यूकैरियोटिक में अंतर (जन्तु vs पादप):
- पादप कोशिकाओं का आकार चौकोर होता है। इनके अंदर का सबसे बड़ा अंग रिक्तिका (Vacuole) होता है। इनका Vacuoles बड़ा होता है। इनमें क्लोरोफिल पाया जाता है।
- जन्तु कोशिकाएं गोल होती हैं। इनके अंदर का सबसे बड़ा अंग केन्द्रक होता है।
गुणसूत्र (Chromosome)
- यह एक धागेनुमा संरचना होती है, जिसका निर्माण DNA तथा हिस्टोन प्रोटीन से मिलकर होता है।
- गुणसूत्र केवल कोशिका विभाजन के समय दिखाई देते हैं। यह हमेशा जोड़े (Pair) में पाए जाते हैं। मानव में यह 23 जोड़ा / 46 पाया जाता है।
- इसकी खोज वाल्डेयर ने की थी। इसके ऊपरी भाग को सैटेलाइट (Satellite) कहते हैं। इसके मध्य भाग को सेंट्रोमियर (Centromere) कहते हैं। इसके निचले भाग को टीलोमियर (Telomere) कहते हैं।
- इसके बीच में धागे के समान संरचना पायी जाती है जिसे Arm कहते हैं।
- Chromosome केन्द्रक के अंदर पाये जाते हैं। Chromosome के अंदर DNA होता है। DNA के अंदर Gene पाया जाता है।
- Gene पर माता-पिता के गुण पाए जाते हैं। अतः Gene ही आनुवांशिकता के आधार हैं।
- Gene Nucleotide का बना होता है। Gene की खोज जोहान्सन ने किया था।
- लिंग निर्धारण: Male (46) = 44 Autosome + 2(XY) Allosome. Female (46) = 44 Autosome + 2(XX) Allosome. Child: 44+2=46.
कुछ जीवों के CHROMOSOME
| जीव | गुणसूत्र संख्या | जीव | गुणसूत्र संख्या |
|---|---|---|---|
| जीवाणु | 1 | चूहा | 40 |
| मच्छर | 6 | खरगोश | 44 |
| घरेलू मक्खी | 12 | मानव | 46 |
| मटर | 14 | आलू | 48 |
| प्याज | 16 | चिंपांजी | 48 |
| नींबू | 18, 36 (छोटा, बड़ा) | तम्बाकू | 48 |
| मक्का | 20 | हाथी | 56 |
| टमाटर | 24 | घोड़ा | 64 |
| मेंढक | 26 | कुत्ता | 78 |
| बिल्ली | 38 | कबूतर | 80 |
| टेरिडोफाइट्स | 1600 (सर्वाधिक) | ||
- हिस्टोन प्रोटीन: हिस्टोन एक प्रोटीन है, जो गुणसूत्र को संरचनात्मक सहारा प्रदान करता है। प्रत्येक गुणसूत्र में डीएनए का एक लंबा अणु होता है जिसे कोशिका नाभिक में समाहित होना आवश्यक होता है। डीएनए हिस्टोन प्रोटीन के संकुलों के चारों ओर लिपट जाता है, जिससे गुणसूत्र को एक सघन आकार मिलता है।
केन्द्रक अम्ल (Nucleic Acid)
यह दो प्रकार के होते हैं— DNA & RNA
DNA (Deoxy Ribose Nucleic acid)
- यह कोशिका के अंदर केन्द्रक, माइटोकॉन्ड्रिया तथा क्लोरोप्लास्ट में पाया जाता है।
- इसकी श्रृंखला को पॉली न्यूक्लियोटाइड (Poly Nucleotide) कहते हैं। DNA, Nucleotide का बहुलक होता है।
- DNA में फॉस्फोरस तत्व पाया जाता है।
- DNA का पहला अवलोकन ‘कार्लसबर्ग’ ने किया। DNA को प्रयोगशाला में हरगोविंद खुराना ने देखा।
- DNA की संरचना Double Stranded होती है, जिसका Model वाटसन एवं क्रीक ने 1953 ई. में दिया था। इसी के लिए उन्हें 1962 में Nobel Prize दिया गया।
- DNA की खोज फ्रेडरिक मिशर ने किया।
- Adenine तथा thymine में Double Hydrogen Bond होता है। Guanine तथा Cytocine में Triple Hydrogen Bond होता है।
Trick: \( A = T \), \( G \equiv C \) - आनुवांशिक गुण का वाहक DNA होता है।
- DNA अनुक्रम में Gene को चिह्नित करने की प्रक्रिया को Annotation कहते हैं।
- Protein की जानकारी प्रदान करने वाले DNA के भाग को Gene कहते हैं।
- DNA में Nitrogen Base में एडेनिन, थायमीन, ग्वानिन, तथा साइटोसिन होता है।
- भारत में DNA फिंगरप्रिंटिंग हैदराबाद में स्थित है। इसका उपयोग अपराधिक मामलों में गुत्थियां सुलझाने के लिए किया जाता है। इस तकनीक से व्यक्ति के जैविक अंश; जैसे – रक्त, बाल, लार, नाखून तथा कोशिका स्रोतों के द्वारा उसके DNA की पहचान की जाती है।
- हाइड्रोजन बंध से DNA की श्रृंखला बंधी होती है।
- दक्षिणावर्ती DNA में 1 (एक) घुमाव में 10 नाइट्रोजनी क्षारक जोड़े होते हैं, जबकि वामावर्ती DNA में 1 (एक घुमाव) में 12 नाइट्रोजनी क्षारक जोड़े होते हैं।
RNA (Ribose Nucleic acid)
- इसकी संरचना Single Stranded होती है।
- इसमें Ribose Sugar पाया जाता है।
- इसके Nitrogen base में Adenine, Guanine, Cytosine होती है। किंतु Thymine के स्थान पर Uracil होता है।
- यह Protein संश्लेषण (निर्माण) में सहायक है।
- यह तीन प्रकार का होता है –
- Messenger RNA (m-RNA): यह अमीनो अम्ल की आवश्यक पहचान करता है तथा उन्हें एक क्रम में सजाता है। प्रोटीन संश्लेषण में क्षार Event से एक mRNA का निर्माण होता है।
- Transfer RNA (t-RNA): यह Amino Acid का परिवहन कर Ribosome तक लाता है।
- Ribosomal RNA (r-RNA): यह प्रोटीन निर्माण करता है। (10 + 10 = 20 एमीनो एसिड = 1 प्रोटीन)
Central Dogma:
- DNA से RNA बनना Transcription कहलाता है।
- RNA से पुनः DNA बना देना Reverse Transcription कहलाता है।
- RNA से Protein बनाना Translation कहलाता है।
- प्रोटीन निर्माण की अंतिम अवस्था Translation कहलाती है।
- DNA से DNA बना देना Replication कहलाता है।
कोशिका विभाजन (Cell Division)
- एक कोशिका का टूटकर दो या अधिक कोशिका का निर्माण कर देना कोशिका विभाजन कहलाता है।
- जिस कोशिका का विभाजन होता है उसे Mother Cell कहते हैं तथा विभाजन के बाद बनने वाली नई कोशिका को Daughter Cell कहते हैं।
- जन्तुओं में कोशिका विभाजन Centrosome करता है। पादपों में कोशिका विभाजन Cell Plate द्वारा होता है।
कोशिका विभाजन तीन प्रकार के होते है –
1. असूत्री विभाजन (Amitosis)
- इसमें कोशिका दो भागों में टूटती है।
- यह विभाजन जीवाणु, विषाणु, सूक्ष्मजीव तथा Prokaryotic में होता है। इसमें सबसे आसान विभाजन होता है।
- इस प्रकार के विभाजन में Mother Cell का आकार बड़ा होने लगता है। उसके आगे चलकर वह बीच में धंस जाता है और दो भागों में विभाजित हो जाता है।
2. समसूत्री विभाजन (Mitosis)
- यह विभाजन कायिक कोशिका (Somatic Cell) (99%) में होता है।
- जनन कोशिका (Ovum & Sperm) (1%) को छोड़कर पूरा शरीर कायिक कोशिका का बना होता है। इसमें एक Mother Cell टूट कर दो Daughter Cell का निर्माण करती है।
- दोनों ही Daughter Cell में क्रोमोसोम समान संख्या में रहते हैं। अतः इसे समसूत्री विभाजन कहते हैं।
- इसकी पांच अवस्थाएँ होती है –
- अन्तरावस्था (Interphase): यह सबसे बड़ी अवस्था है, इसमें DNA का निर्माण होता है तथा Chromosome अलग हो जाते हैं। (विभाजन पूर्व तैयारी)
- पूर्वावस्था (Prophase): इसमें Spindle-Fiber (तुकक धागा) का निर्माण प्रारंभ होता है तथा केन्द्रक का विभाजन हो जाता है।
- मध्यावस्था (Metaphase): इसमें Spindle-fiber का निर्माण पूर्ण हो जाता है। अध्ययन के सुविधा के अनुसार यह सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है।
- पश्चावस्था (Anaphase): यह सबसे छोटी अवस्था है। इसमें Chromosome तथा कोशिका के अंग ध्रुवों की ओर चले जाते हैं।
- अंत्यावस्था (Telophase): यह सबसे अंतिम अवस्था है। इसमें विभाजन का कार्य पूर्ण हो जाता है और कोशिका के सभी अंग आ चुके होते हैं और Spindle-fiber गायब हो जाता है।
Remark:
- कोशिका में होनेवाले निरंतर टूट-फूट की भरपाई समसूत्री विभाजन द्वारा होता है।
- छिपकली तथा चूहा का पूंछ समसूत्री विभाजन द्वारा दोबारा निकल जाता है।
3. अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis)
- यह विभाजन केवल जनन कोशिका (Sperm & Ovum) में होता है। इसमें क्रोमोसोम की संख्या घटकर आधी हो जाती है।
- इसमें एक Mother Cell चार Daughter Cell में बँट जाती है।
- इसमें Crossing Over की घटना होती है।
- इनका Prophase अवस्था सबसे बड़ा होता है।
- Colour Blindness में X क्रोमोसोम प्रभावित होता है।
सिंड्रोम (Syndrome)
Chromosome में होनेवाले अनियमितता को सिंड्रोम कहते हैं। इसके कारण शरीर में असामान्य लक्षण उभर जाते हैं।
1. टर्नर सिंड्रोम (Turner Syndrome)
- मादा में एक x गुणसूत्र का अभाव होता है।
- इसमें Chromosome की संख्या 45 हो जाती है। यह केवल स्त्रियों में पायी जाती है। इसमें स्त्रियों का शरीर अविकसित होता है तथा उनमें बांझपन देखा जाता है।
2. क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome)
- इसमें Chromosome की संख्या 47 हो जाती है। यह केवल पुरुषों में पाए जाते हैं। इसमें पुरुष नपुंसक हो जाते हैं।
3. डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome)
- इसमें Chromosome की संख्या 47 हो जाती है। यह Male तथा Female दोनों को हो सकता है। इसमें शरीर बेडौल हो जाता है। जीभ तथा होंठ मोटा हो जाता है। व्यक्ति मंदबुद्धि हो जाता है। ऐसे व्यक्ति को मंगोलाइड कहते हैं।
- 21वां गुणसूत्र 2 के जगह 3 हो जाते हैं।
4. पटाऊ सिंड्रोम (Patau Syndrome)
- इसमें Chromosome की संख्या 47 हो जाते हैं। यह Male & Female दोनों में हो सकता है। इसमें व्यक्ति मंदबुद्धि होता है और उसके ऊपर का होंठ कटा होता है।
- पटाऊ सिंड्रोम में गुणसूत्र -13 की अतिरिक्त प्रति सभी गुणसूत्र पर चढ़ा जाती है।
Note:
- Virus (विषाणु) कोशिका सिद्धांत का पालन नहीं करता है।